शिक्षा मनुष्य के जीवन का महत्वपूर्ण अंग रहा है, शिक्षित और संस्कारित व्यक्तित्व ही राष्ट्र और समाज निर्माण में सहयोग दे सकता है। सकारात्मक शिक्षा “मानव मस्तिष्क का विकास, प्रतिभा का उन्नयन, दक्षता, विवेकशीलता, सदाचरण” आदि आदर्श गुणों की जननी है। ऐसे सदगुणों से सुशोभित शिक्षा की प्राप्ति सकारात्मक एवं पवित्र वातावरण में ही संभव है। ऐसी दूरदर्शी सोच को ध्यान में रखते हुए, ‘ध्येय’ (लक्ष्य) की प्राप्ति हेतु उत्तर भारत के एक मात्र (अन्तिम अनुबध्य केवली श्री 1008 जम्बूस्वामी भगवान की निर्वाण स्थली) सिद्धक्षेत्र चौरासी, मथुरा (उ.प्र.) की पावन वसुंधरा पर “श्रमण ज्ञान भारती छात्रावास” का 11 जुलाई 2001 को बीजारोपण हुआ।
     संस्था के अधिष्ठाता के रूप में श्री निरंजनलाल जी बैनाड़ा आगरा द्वारा निभाया गया उत्तरदायित्व उल्लेखनीय रहा है, संस्था को पोषित कर फल देने योग्य बनाने का श्रेय आपको ही है। साथ ही जम्बूस्वामी सिद्धक्षेत्र के अध्यक्ष जो संस्था के भी अध्यक्ष हैं श्री सेठ विजय कुमार जी संस्था को जीवंत बनाने का उपक्रम करते रहते है।
   देश के जाने-माने विद्वान श्री रतनलाल जी बैनाड़ा आगरा, पं. सुशील जी मैनपुरी, श्री नरेंद्र प्रकाश जी फ़िरोज़ाबाद, ब्र. जयनिशांत जी टीकमगढ़, आदि का समय-समय पर शिक्षण व संरक्षण संस्था को प्राप्त होता रहता है